सपना नए भारत का 

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चली हूँ मैं लेके विश्वास
अपने मन में
विश्वास हैं मुझे
नया होगा सवेरा
फूल महकेंगे
छू लेगी हंसी
जो खो गयी है कहीं
स्कूलों की दीवारों में

बच्चे खेलेंगे फिर
नाचेंगे फिर
ना रहेंगे बंधे
किताबों को रटने में
देखेंगे वह तितली के पंख को
जानेंगे वह चींटी के श्रम को
निर्मित करेंगे प्रश्नों को

ऐसा होगा सवेरा वह
जहां काम हाथ का बहुमूल्य होगा
मिट्टी से बनायेंगे जब वह एक मटकी
ना सिर्फ होगी मिट्टी से पहचान
पर अपने इतिहास का होगा ज्ञान
मिट्टी की खुशबू से
जानेंगे वह अपनी संस्कृति को
कैसे हुआ था मोहनजोदारो में मटकी का निर्माण
सदियों के परिवर्तन से उस मटकी में जानेंगे अपनी सभ्यता को
महसूस करेंगे हर्ष प्रवाह का
करेंगे वास्तविक जीवन में उपयोग गणित और जियामेट्री का
भाषा से करेंगे व्यक्त अपने उल्लास को
बन जायेगा हर दिन उत्सव स्कूल का

येह होगा तब शिक्षक बनेगा शिक्षार्थी
न हाथ में कोई डंडा
और न ही कोई चाक
पर बाहों में ताकत तारों को छुने की
और दिल में है आशा
आसमान में उड़ने की
जब मन औरहाथों का होगा मेल
तब होगा सृजन साहस का
बाटेंगे सपनों को
सपने छिन ते थे जहां
अब बनाना है डेरा ख्वाबों का

दिल में है विश्वास
मानव क्षमता पे
जब कर पाएंगे प्रेरित
अपने जीवन से
तभी युवक देखेंगे सपना
एक नए कल का
एक नए भारत का

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